तीसरा रास्ता एन जी ओ पर केंद्रित उपन्यास के दो अंश
तीसरा रास्ता उपन्यास के दो अंश राजनीतिक व सामाजिक रूप से तीसरा रास्ता क्या हो, कैसा हो? एन.जी.ओ. संस्कृति ने क्या सामाजिक बदलावों के लिए ईमानदारी से प्रयास किया? एन.जी.ओ. की गतिविधियों का यथार्थ लेखा जोखा प्रस्तुत करता उपन्यास है तीसरा रास्ता... तीसरा रास्ता फन्ड राजनीति के घालमेल पर से भी पर्दा उठाने का एक प्रयास है. देखें..... गोत्र ठीक एक साल पहले सुधा मानवाधिकार जन समिति में एक्टिविस्ट की तरह भर्ती हुई थी और अमरेश सुधा से साल भर बाद सहायक एकाउन्टेन्ट के पद पर। उस समय निखिल दा वहां एकाउन्टेन्ट विभाग के सर्वे-सर्वा थे। संस्था के मंत्री जी भी उन्हें सलाम बजाते। उन दोनों के रिश्ते में ऐसा क्या कुछ था कि दफ्तर की सामान्य परम्परा भी उनमें न दिखती, किसी को कुछ नहीं मालूम। मालूम तो सुधा के बारे में भी किसी को कुछ नहीं था सिवाय इसके कि वह नशीली हवा की तरह है, तीस साल के भीतर वाली युवती, भरपूर जवानी औ...